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मधुमक्खी के हमले में जान गंवाने वाले अंपायर को 16 साल की बेटी ने दी मुखाग्नि गंगा तट पर बोली मइया, पिताजी की भूल-चूक माफ करना

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कानपुर । सीनियर क्रिकेट अंपायर मानिक गुप्ता का बुधवार को गंगा किनारे भगवतदास घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। परिवार में बेटे के न होने पर उनकी 16 वर्षीय सबसे छोटी बेटी समृद्धि ने मुखाग्नि दी। भावुक माहौल में बेटी ने पिता के चेहरे को बार-बार सहलाया, माथे पर टीका लगाया, माला पहनाई और चिता पर पहली लकड़ी रखी। मुखाग्नि देते समय वह फूट-फूटकर रो पड़ी, जिसे रिश्तेदारों ने संभाला। गंगा तट पर मौजूद हर आंख नम हो गई।
अंतिम संस्कार से पहले समृद्धि ने गंगा मां से प्रार्थना की “गंगा मइया, हम आपके चरणों में पिताजी का दाह संस्कार कर रहे हैं। मेरी और पिताजी की भूल-चूक को क्षमा कर दीजिए।” इसके बाद उसने पूरे विधि-विधान से सभी रस्में निभाईं और चिता के पास बैठकर गंगा जल हाथ में लिए जलती चिता को निहारती रही।
घटना उन्नाव के गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र स्थित राहुल सप्रू मैदान की है। यहां अंडर-13 क्रिकेट लीग का मैच चल रहा था। मैदान की बाउंड्रीवॉल से सटे बरगद के पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता लगा था। सुबह से ही मधुमक्खियां मंडरा रही थीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सुबह करीब साढ़े आठ बजे अचानक मधुमक्खियों का पूरा झुंड टूट पड़ा। खिलाड़ियों, अंपायरों और ग्राउंड स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई। मानिक गुप्ता मधुमक्खियों से बचने के लिए भागे, लेकिन गिर पड़े। इसके बाद 50 से अधिक मधुमक्खियों ने उन्हें घेर लिया और करीब 10 मिनट तक लगातार डंक मारती रहीं। इस हमले में 40-50 लोग प्रभावित हुए, जबकि अंपायर को सबसे ज्यादा डंक लगे।
घायल अंपायर को पहले शुक्लागंज के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए रेफर कर दिया गया। इसके बाद दो अन्य अस्पतालों में भी भर्ती से इनकार कर दिया गया।
आखिरकार हैलट अस्पताल ले जाते समय शुक्लागंज-कानपुर गंगापुल पर भीषण जाम में एंबुलेंस फंस गई। महज 12 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब दो घंटे लग गए। रास्ते में ही मानिक गुप्ता की सांसें थम गईं। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।
कानपुर के फीलखाना क्षेत्र के रहने वाले मानिक गुप्ता पिछले करीब 30 वर्षों से कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन के लिए अंपायरिंग कर रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई। साथी अंपायर, खिलाड़ी और परिचित बड़ी संख्या में उनके घर और अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
मानिक गुप्ता के परिवार में पत्नी कुशुमलता गुप्ता और चार बेटियां हैं। बड़ी बेटियां प्रियंका, दीपिका और श्वेता विवाहित हैं, जबकि समृद्धि इंटरमीडिएट की छात्रा है। जब अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान रस्में निभाने को लेकर सवाल उठा, तो समृद्धि आगे आई और बोली—“पिताजी का अंतिम संस्कार मैं करूंगी।”
घर से अर्थी उठने पर पत्नी कुशुमलता शव देखकर बेसुध हो गईं और बिलख पड़ीं। घाट पर पहुंचने के बाद समृद्धि ने पिता को अंतिम स्नान कराया, कपड़े बदलवाए, पूजा-अर्चना की और फिर मुखाग्नि दी।
गंगातट पर एक बेटी द्वारा निभाया गया यह साहसिक और भावुक फर्ज हर किसी के लिए मिसाल बन गया।

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